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Monday, September 29, 2014

जीवन क्या है
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जीवन क्या है,
बस ख्वाबों, ख्वाहिसों,
अभावों व असंतोषों का पिटारा,
जलते हुए शब्दों में,
तलती हुई कविता,
शह-मात का खेल,
और जीत कर अट्ठाहास करती,
विद्रूप और कलुषित मानसिकता,
हार कर विरूपित होते एहसास,
संकुचित होती आंचल,
अवसाद और पीड़ा के नीला पड़ते निशान,
जीवन क्या है,
बस स्वार्थ और आत्ममुग्धता से,
उलझते धागों का बंधन,
अविश्वास और प्रतिघात के लिए,
सजते चेहरों पर मुखौटों का आवरण,
कमर के खींसे में खोसे हुए खंजर,
जीवन क्या है,
प्रकृति के नियमों से खेलना,
आने वाली पीढ़ियों को खाई में धकेलना,
सोने की सेज़ के लिए,
चिड़ियों के घोसलों को रौंदना,
औरों के घरौंदों को उजाड़ना,
जीवन क्या है
................................मनोरंजन
 

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