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Tuesday, September 23, 2014

लगता है सब सो गए है
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आज फिर शायद वो पीकर घर आया है,
बच्चों के चीखने- चिल्लाने का शोर,
और बर्तनों के पटकने, चूडियों के टूटने की आवाजें,
और  बिल्कुल निरीह आवाज में,
सिसकने की आवाज कानों में फिर से,
किसी पिघले हुए धातु की तरह रिसता चला जा रहा है,
कोई नहीं आता, कुछ भी पुछने के लिये,
लगता है सब सो गए है।
लोग तब भी सो रहे थे,
जब एक चलती हुई बस से,
दरिंदों ने फेंक दी थी एक लड़की को,
भरे बाज़ार में उसका सब कुछ लूट कर,
सरकार सो रही थी,
पुलिस वाले सो रहे थे,
और सारा बाज़ार सोया हुआ था,
नींद में बेसुध पड़े लोग कई दिनों के बाद जगे,
जब वो लड़की अपनी अंतिम साँसे गिन रही थी,
लोगों की ये बेरहम नींद टूटती नहीं,
बस लुटती जा रही है, कई जिंदगियां,
इस नींद के आगोश में,
और ये सिलसिला चलता जा रहा है,
कभी पेड़ से लटका देते है,
कभी किसी शोरूम में,
सिसकियों को दफ़न करने का,
सिलसिला यूं ही चलते जा रहा है,
मगर नींद नहीं टूटती है,
भयानक अंधेरा पसरा हुआ है चारों तरफ़,
किस्म-किस्म की हवाएं तेज़ बह रही है,
सब अपने -अपने टिमटिमाते दिये को बचने में लगे हुए है,
तभी कहीं से कोई अंधेरे का दूत आता है,
और फूंक मर कर दिया बूझा देता है,
फिर अंधेरा पसर जाता है,
मगर आस-पास वालों को कोई फर्क नहीं पड़ता,
किसी और के घर में अंधेरा हो जाने से,
किसी के पास वक्त नहीं है,
किसी और के आँखों की नमी,
अपने आँखों में महसुस करने की,
और सबकी बारी आती है,
क्योंकि हवाएँ किस्म-किस्म की है,
और बहुत तेज़ बह रही है,
दूर कहीं-कहीं से सजग करने की आवाजें आ जाती है,
मगर ये आवाजें किसी के कानों तक नहीं पहुँच पाती है,
लगता है सब सो गए है।................मनोरंजन
http://manoranjan234.blogspot.in/

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