आईना तो कभी झूठ बोलता नहीं
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आईना तो कभी झूठ बोलता नहीं,
मैं वही हूँ, कहीं बदला तो नहीं,
फिर हुई क्या खाता, क्या हुई है गुनाह,
लोग घर में मुझे, क्यों पहचानते नहीं।
आँखें भी है वही, दिल भी ऐसा ही था,
है नज़र भी वही, ऐसा मंजर भी था,
है कयामत की, यहाँ सबको जनता हूँ मैं,
पर लोग मेरे नाम तक को जानते नहीं।
आईना तो कभी झूठ बोलता नहीं,
मैं वही हूँ कहीं बदला तो नहीं।...........................मनोरंजन
http://manoranjan234.blogspot.in/
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