=================
रुको भाई, जरा ठहरो,
अपने उड़ने वाले घोड़े के बक़ल से,
पैर निकाल कर ज़मीं पर तो रखो,
देखो, कितना ख़ूबसूरत फ़िज़ा है,
जरा इत्मिनान से बैठो यहाँ,
और सब कुछ भुल कर इन नजरों को निरखो,
भरने दो अपनी साँसों में इस ख़ुश्बू को,
छुपा लो अपने मन के किसी कोने में इस ख़ूबसूरती को,
ताकि महसुस होता रहे ये ग़ुलशन तुम्हे पूरी यात्रा में
ठहरो, की ये भी बहुत मूल्यवान है,
तुम्हारी उड़ान की तरह ही,
एक दिन इसे महसुस करोगे तुम,
मगर तब तुम्हे इस उड़न घोड़े के बक़ल से,
पैर निकालने की फुरसत ना मिलेगी। @ मनोरंजन
रुको भाई, जरा ठहरो,
अपने उड़ने वाले घोड़े के बक़ल से,
पैर निकाल कर ज़मीं पर तो रखो,
देखो, कितना ख़ूबसूरत फ़िज़ा है,
जरा इत्मिनान से बैठो यहाँ,
और सब कुछ भुल कर इन नजरों को निरखो,
भरने दो अपनी साँसों में इस ख़ुश्बू को,
छुपा लो अपने मन के किसी कोने में इस ख़ूबसूरती को,
ताकि महसुस होता रहे ये ग़ुलशन तुम्हे पूरी यात्रा में
ठहरो, की ये भी बहुत मूल्यवान है,
तुम्हारी उड़ान की तरह ही,
एक दिन इसे महसुस करोगे तुम,
मगर तब तुम्हे इस उड़न घोड़े के बक़ल से,
पैर निकालने की फुरसत ना मिलेगी। @ मनोरंजन