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Monday, March 23, 2015

हम साथ नहीं तो क्या हुआ

हम साथ नहीं तो क्या हुआ
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जिंदगी तुम बिन अधूरी तो है,
पर ज़श्न ए संघर्ष की तरह,
आस्था और गर्व की तरह,
अबोध बच्चे के हर्ष की तरह,
हम साथ नहीं तो क्या हुआ,
ख़्वाब जहाँ हकीकत से मिलता है कभी,
जैसे धरा मिलती हुई दिखती है आसमान से कहीं,
कमल के फुल पर जैसे,
सबनम की बूंदें,
साथ भी हर पल और
हर पल ज़ुदा-ज़ुदा सा,
जैसे आँसू की बूंदे ठहरी हो पलकों पर,
रहती हो तुम मुझ में,
मेरे जीवन के सतह पर। @ manoranjan

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