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Monday, March 23, 2015

सिर्फ शब्द ही शाश्वत है पार्थ

सिर्फ शब्द ही शाश्वत है पार्थ
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केवल शब्द ही,
अजर है,
अमर है,
सार्थक है,
बाकी सब नाश्वर है पार्थ!
तुम जो भी कर्म करते हो,
शब्द संरचना हेतु ही करते हो,
शब्दों के बिना,
हर कर्म निरर्थक है पार्थ!
सोचो क्या मिला किसी शाहंशाह को?
उतना ही ना,
जीतना एक फ़कीर को भी नशीब हो जाता है,
सब शब्दों का व्यापार है पार्थ!
ये भय, भूख और भगवान,
भक्ति, आसक्ति और निर्वाण,
सब शब्दों की बाज़ीगरी है पार्थ!
शब्दों ने ही किसी को फुल कहा,
किसी को कहा कांटा,
कई दिलों को जोड़ा,
कई दिलों को बांटा,
शब्दों ने ही प्रेम सिखाया,
और नफरत भी,
जब शब्द नहीं थे,
तब तो सिर्फ देह हुआ करती थी,
शब्दों ने ही इश्क को ईश्वर सा बनाया,
सब शब्दों की महिमा है पार्थ!
शब्दों ने धरती बांटी,
नदियाँ बांटी,
सागर बांटा,
शब्दों ने इंशानों को इंशानों से बांटा,
शब्दों ने ही दीवारें खड़ी की किस्म-किस्म के,
पहले हया, हिया और हसरतें पैदा की,
फिर उन्हे ढकने को परदें बनवाये,
शब्द बहुत ताकतवर है पार्थ!
शब्दो को सिखना, गुनना और बुनना,
एक कला है पार्थ!
ये कला ही जीवन का ध्येय है,
बाकी सब मोह-माया है पार्थ! @ मनोरंजन

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