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Saturday, June 28, 2014

स्मृति शेष-5
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जानता हूँ,
प्यार बहुत मायने रखता है तुम्हारे लिये,
जिस्म नहीं,
ना मेरा ना तुम्हारा,
पर बोलती नहीं हो,
दुनिया भर की बातें बोलती हो,
सिर्फ इसे छोड़ कर,
सब कुछ माँगते हुए झिझकती नहीं,
पर अपना हक,
अपना अधिकार मुझ पर,
नहीं मांगती हो,
सारे फैसले तो तुम्ही करती हो,
फिर ये क्यों मेरे लिये छोड़ दिया?
ये तुम्हारे विश्वास की हार है,
या मेरे हिम्मत की हार है,
जो आज हम एक साथ नहीं है,
बावजूद इसके की प्यार मैं भी तुमसे करता हूँ,
और तुम भी करती हो मुझसे,
क्योंकि सिर्फ मेरे ही आँसू नहीं बहे थे उस दिन,
तुम्हे भी दर्द हुआ था,
तुम्हारी भी अवाज़, भरभरा गई थी,
और जानता हूँ मैं की बेज़ार होकर रोई भी थी तुम,
क्योंकि, प्यार बहुत मायने रखता है तुम्हारे लिये,
जिस्म नहीं।............................................................मनोरंजन
http://manoranjan234.blogspot.in/

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