स्मृति शेष-6
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दुनिया मुझे जानती है,
एक सुलझे हुए, समझदार इंसान के रूप में,
एक जिम्मेवार और शान्तिप्रिय इंसान के रूप में,
शालीन,सुशील, संवेदनशील इंसान के रूप में,
पर जब भी तुम्हारे सामने आता हूँ,
तो बन जाता हूँ एक बच्चा,
उदंड, गैर-जिम्मेवार और असंवेदनशील,
क्या बोलूँ? क्या ना बोलूँ?
के भँवर में उलझा,
अक्सर कुछ गलत बोल जाता हूँ,
अक्सर कुछ गलत कर जाता हूँ,
तुम समझ लो यही मेरा असली चेहरा है,
क्योंकि, मिलता हूँ जब भी तुमसे तो,
मेरा मन, पूरा मेरे व्यक्तित्वा का आकार ले लेता है,
और जब दुनिया के सामने जाता हूँ,
तो मेरा मन सिकोड़ कर अस्तित्वहीन हो जाता है,
कौन सी स्थिति अच्छी है "परी"?
कौन सा रूप तुम्हे पसंद है?
वो जब मेरा मन पूरा व्यक्तिवा का आकार ले लेता है,
या वो जिसमे मेरा मन सिकोड़ कर अस्तित्वहीन हो जाता है.......मनोरंजन
http://manoranjan234.blogspot.in/
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