कविता सी कुछ ---------
यह मेरे किताब की रफ़ पण्डुलिपि है
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Saturday, June 28, 2014
दिल
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दिल ही मिला था अजीब,
चैन की जिंदगी होने ना दी नसीब,
जिसको चाहा उसे अपना ना सका,
जो मिले वो ना हुए इसके मुनासिब....
दिल ही मिला था अजीब।.............................................मनोरंजन
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