संग-दिल मिजाज़
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सुन कर तेरे दुख और दर्द को,
आँसू ना आये मेरी आँखों से,
तो ना समझ लेना मुझे बेदर्द,
तू समझ लेना की आँसू है ही नहीं मेरे पास,
दर्द दिल में है मगर,
धूप ने सूखा दी है ये आँसू,
रात को जगते हुए में,
देखता हूँ रोज ख्वाब,
ख्वाब तो अनन्त है,
पर अंत में तो तुम्ही हो,
ख्वाब के शुरुआत में भी,
तुम ही थे मुझको है याद,
ख्वाब का एतबार कर लो,
आए मेरे संग-दिल मिजाज,
मैं समझता हूँ की,
तुम मेरी खामोशी सुनते हो,
सुनते हो तुम,
मेरे दिल से उठने वाली हर आवाज,
मैं तुम्हारी आँखों को देख,
जान जाता हूँ सब राज,
राज को तो राज रहने दो,
मेरे संग-दिल मिज़ाज।
मैं तुम्हारी उम्मीद पर,
खरा ना उतरा तो क्या,
तुम, मेरी उम्मीद के दम पर,
आगे को बढ़ते जा,
बढ़ते जा इस रह में,
हम मिलेंगें कभी-ना-कभी,
तब ही होगी सच में,
हम दोनों के सच का हिसाब।...................मनोरंजन
http://manoranjan234.blogspot.in/
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