हवाएँ कैद है जहाँ
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बहुत वक्त गुजर गया,
उसकी कुछ खबर नहीं मिलती,
वहाँ से आने वाली हवाओं को,
कैद कर लिया है किसी ने शायद,
हर रोज होती है,
हजारों मौत जिसके शहर में,
उन्हे कोई चीख सुनाई देती नहीं,
मुर्दनी निंद में बेहोश पड़े है सब शायद.........मनोरंजन
http://manoranjan234.blogspot.in/
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