कविता सी कुछ ---------
यह मेरे किताब की रफ़ पण्डुलिपि है
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Monday, June 23, 2014
तूने पुकारा मुझे तो,
ये यकीन हुआ की,
आज भी मैं कहीं-ना-कहीं जिंदा हूँ,
तुम्हारी आवाज की खनक ने,
ये जाता ही दिया,
की साँस बाकी है अभी,
मैं, तुममे जिंदा हूँ...................मनोरंजन
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