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Tuesday, June 24, 2014



दूसरे दुनिया के लोग
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नयन-नक्श सुन्दर है उसके,
पर उसने, शायद इस सच को आत्मसात कर लिया है,
की उसका खाना उतना जरूरी नहीं,
जितना घर के पुरुष सदस्यों का है,
कपड़े भी ऐसी पहनती है,
जैसे जानती हो इस सच को,
की अच्छा है अगर कोई उसे गौर से ना देखे,
और मैं भी कहाँ देखने वाला था उसे,
अगर आँखों में आज काजल ना लगाया होता,
आज रक्षाबन्धन था ना,
बाकी दिनों की तरह अपने भाई के छोडे हुए,
बेढंगे कपड़े नहीं पहने थे उसने,
बल्की आज तो अपनी एकलौती और
बड़े सहेज कर रखी हुई छिट की फ्राक पहन रखी थी,
कितना उमंग और उत्साह दिख रहा था उसके चेहरे पर,
अपने भाई के कलाई पर राखी बांधने की, 
एक बार भी उसके मन में,
नहीं आया होगा शायद,
की जिस तरह उसका भाई जाता है स्कूल,
उसे भी जाने का पुरा हक है,
हक?
इस शब्द से तो शायद परिचित भी ना होगी वो,
बचपन से देखता रहा हूँ उसे ऐसे ही,
कभी उसके चेहरे पर शिकायत ना देखी,
उसके मन में ना आया होगा की,उसके सामने,
हो रहा लड़का-लड़की के बीच, इतना भेदभाव,
गलत भी होता है,
बल्की वो तो खुद इस धरणा में रच-बस गई है इसतरह,
की किसी काम को छुने भी ना देती है अपने भाई को,
एक दिन दिनू काका से पूछ ही लिया,
काका इतने काम क्यों कराते हो इससे?
दिनू काका ने कहा,
बाबु, काम ना करेगी तो कहाँ से जोडूंगा,
इसके दहेज के रूपये।.....
सिधा जबाब था, कुछ बोला ना गया,
बस मन में सोचा,
किसी दूसरी दुनिया के लोग ही है शायद..................मनोरंजन

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