झूठा सच
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उनके व्यक्तित्व का जादू कुछ ऐसा है,
की उनका हर झूठ, सच सा लगता है,
और मेरा हर सच भी झूठ बन जाता है।
फक्र उन्हे भी हो खुद पर, इसके लिए,
ना जाने कितनी बार तोड़ा है खुद को मैने,
उनकी मुस्कुराहटें सजी रहे, उन्हे होठों पर,
ना जाने कितने आँसू मैने बहाए इसके लिए,
वो सच कहते है की, मैने उन्हे कुछ ना दिया,
तभी ना बचा कुछ भी मेरा, उनके पास,
जबकि उनके दिये दर्द को, संजोये है मैने,
अपने जीवन की सबसे मूल्यवान निधि की तरह,
गुनगुनाता हूँ उनकी यादों को,
अपने जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि की तरह।.......................मनोरंजन
http://manoranjan234.blogspot.in/
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