कुछ नज़्म आपके नज़र
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कसम खाते थे कल तक जिसकी वफ़ाओं का,
सुना है आज वो शख़्स बेवफा हो गया।
कल तक जिसके जुल्मों-सितम से सफ़ेद हो रहे थे लोग,
दौलत के दम पर आज वो, उनका रहनुमा हो गया।
जिसके हाथों के हूनर से मुस्कुराती थी धरा,
शहर में आकर वो मेहनतकश बेचारा हो गया।
नादानियाँ मैने नहीं की, मेरा तो राहवार था वह,
दौलत के चकाचौंध से वो मेरा रक़ीब बन गया।.................मनोरंजन
http://manoranjan234.blogspot.in/
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