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Monday, August 4, 2014

अए मुस्कुराहट
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अए मुस्कुराहट,
तुम फिर लौट कर आना,
मेरी बिखरी हुई जिन्दगी के,
एक टुकडे को चुमने,
मेरी उखडी हुई संसों को सहलाने के लिए,
जब तुम थी मेरे वजूद में,
तो गुस्सा आती थी तुम्हारी हर आदा पर,
तुम्हारे बिना कोई अस्तित्व ही ना रहा मेरा,
वजूद छोटा पड गया है सिमट कर,
अए मुस्कुराहट,
तुम एक बार जरूर लौट कर आना,
मेरे वजूद को आलिंगन में लेने के लिए,
ये आँखें शून्य आसमान टकटकी लगाये रहती है,
जैसे ढून्ढ रही हो तुम्हे निले आसमान में,
जो कल तक तुम्हारी हर आदा पर तुम्हे चिढाती थी,
वो आज तुम्हारे बिना सुना होकर पथरा सी गई है,
अए मुस्कुराहट,
तुम एक बार लौट कर आना,
इन आँखों को एक बार चुने के लिए,
तू थी मेरे अस्तित्व में तो,
हर अंग-अंग में थिरकन थी,
ख्वाब भी कितने हसीन और सुहानी आती थी,
तुम्हारे अनुपस्थिति में बागी हो गए है हर अंग,
सपनें भी कितना निर्मम और विरूपित हो गए है,
अए मुस्कुराहट,
तुम एक बार जरूर आना,
मेरे हर अंग-अंग को पुलकित करने,
अए मुस्कुराहट,
तुम एक बार लौट कर आना,
मेरी बिखरी हुई जिन्दगी के एक टुकडे को चुमने।..............................मनोरंजन
http://manoranjan234.blogspot.in/

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