अब नहीं होता कुछ पहले जैसा
====================
बातें तो वो अब भी,
कर लेती है मुझसे,
बल्की पहले से ज्यादा सलिनता से,
तमीज़ से, और समझदारी से,
पता नहीं इतनी तमीज़ कहाँ से सीख ली उसने,
कुछ तो टूटा है उसके अंदर,
अब उसे मेरे फोन का इंतजार नहीं रहता,
अब नहीं करती शिकायत,
मेरे कई दिन बाद फोन करने पर भी,
अब नहीं कहती,
सारी दुनिया के लिये तो तुम्हारे पास समय है,
एक मुझे छोड कर,
अब नहीं देखती आँखों को तिरछा करके,
और आँखों से नहीं बहने देती अब एक बूंद भी पानी,
जो पहले हर बात में,
उसके गलों पे लुडक आते थे ना जाने कहाँ से,
अब सह जाती है,
सबकुछ चुपचाप,
नहीं होती परेशान कहीं भी जाने में,
जो कल तक कहती थी,
कैसे चली जाऊ अकेली,
चलो मेरे साथ,
अब नहीं जताती,
किसी भी तरह का हक मुझ पर,
गुस्सा आती थी जीस बात पर हरदम,
और अब गुस्सा नहीं आती,
उसके किसी भी बात पर,
बस मन तडपता है उसकी नजरों में,
इतना महत्वीन हो जाने के एहसास से।....................मनोरंजन
http://manoranjan234.blogspot.in/
No comments:
Post a Comment
Write here