माँ नहीं थकती कभी
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माँ नहीं थकती कभी,
सुबह सोकर उठने के बाद से,
रात में सबको खिला-पीला कर सुला लेने के बाद,
चंद घंटों की नीम बेहोशी की सी नींद में सोने तक,
माँ कराहती भी नहीं,
तब तक जब तक की शरीर,
बिल्कुल ही साथ देना बंद कर दे,
क्योंकि माँ को किसी से दाज नहीं,
डाह नहीं किसी से,
उसे इस बात की परवाह नहीं की,
सारे काम वो खुद करेगी,
या कोई उसका हाथ बटायेगा,
सब उसके ही तो है,
उसके लिये कोई अपना और कोई पराया नहीं,
माँ नहीं सोचती,
हमारी पत्नियों की तरह,
इसिलिये माँ थकती नहीं,
और माँ कराहती भी नहीं।..............................मनोरंजन
manoranjan234.blogspot.in
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