हे माधव
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मुक्त गगन की चाह ने, बदली जीवन की धारा,
कभी चैन से सोया नहीं, कभी जीता, कभी हारा।
पाया भी बहुत और खोया भी, हँसा कभी, कभी रोया,
तुमको ही साथ पाया हे माधव, जब नहीं रहा कोई सहारा।।..............मनोरंजन
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मुक्त गगन की चाह ने, बदली जीवन की धारा,
कभी चैन से सोया नहीं, कभी जीता, कभी हारा।
पाया भी बहुत और खोया भी, हँसा कभी, कभी रोया,
तुमको ही साथ पाया हे माधव, जब नहीं रहा कोई सहारा।।..............मनोरंजन
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