Followers

Monday, August 18, 2014

मेरे बच्चे तुम कुछ ऐसा बनना
================
अगर कुछ बनना ही चाहते है तो,
नेक बनिये, अजीज-ए-दिल हरेक बनिये,
नेक होना, दब्बू, कायर और डरपोक होना नहीं होता,
दिल में स्वभिमान, आत्मसम्मान की ज्योती जलाये रखिये।

मधुर बनिये, दिल से मज़बूत बनिये,
मज़बूत बनने के लिए,
किसी को डराने, धमकाने या तडपाने की जरूरत नहीं,
मज़बूत तो वह है,
जो जरूरतमंदों का सहारा होता है,
किसी डुबते हुए का किनारा होता है।

सरल, सुशील और शलीन बनिये,
शालिनता के किस्से नहीं बनते,
समाचार पत्रों के हेडलाइन्स नहीं बनते,
शालिनता तो वह है,
जो किसी अशांत मन में उतर कर शीतलता प्रदान कर्ता है।

बहादुर बनिये, बेफिक्र बनिये,
बेफिक्र होना, बेपरवाह और बदतमीज़ होना नहीं होता,
बेफिक्र तो वह है जो,
अपनी जिम्मेवारियों और कर्तव्यों को पूरा कर,
सुकुन की निंद लेता है।

अनुशासित और अज्ञाकारी बनिये,
अनुशासित होकर किसी भी तरह,
आपके स्वतंत्रता, स्वच्छंदता का हनन नहीं होता,
बल्कि जीवन रूपी पौधा अनुशासित होकर,
नित नई उंचाइयों को छूता है,
और मधुर फलदायी होता है।

सकारात्मक, सुलझे और समझदार बनिये,
समझदार होना, चलाक होना नहीं होता,
किसी को ठगने, धोखा देने,
और किसी की कमजोरियों का,
फायदा उठाने वाला समझदार नहीं होता,
बल्कि समझदार तो वह है जो,
किसी की उलझी हुई जिन्दगी को सुलझा दे,
किसी के जीवन से दर्द, गम और निराशा को मिटा कर,
उसके जीवन में आनंद और हर्षोउल्लास की ज्योती जला दे।

दयालु, दानशील और दिलेर बनिये,
दिलेरी, बेफजूल के शर्तों,
और आन-बान-शान की खातीर,
अपने जीवन को खतरे में डालने में नहीं है,
बल्कि, किसी के होठों पर मुस्कुराहट और 
जीवन में खुशी लाने के लिए,
अपने आप को पुरी निष्ठा, इमानदारी और निस्वार्थ भाव से,
समर्पित कर देने में है।
क्योंकी,
पुरी निष्ठा, इमानदारी और निस्वार्थ भाव से,
किसी को कुछ देकर,
जो खुशी और आनंद मिलता है,
वह किसी भी तरह,
दौलत, शोहरत और कामयाबी को पाकर नहीं मिलता।.............मनोरंजन 
http://manoranjan234.blogspot.in/

No comments:

Post a Comment

Write here