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Thursday, August 21, 2014

एक शब्द
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सोच रहा हूँ,
 वो लब्ज़ जो तुम्हे लिखना है,
 वो जादू की पुड़िया में लिपटे कुछ शब्द,
 जो तुम्हारे मन से भुला दे,
 वो सारी कड़वी यादें,
 जो तुम अपने जीवन के सफर में,
 समेटती रही अपने आँचल में,
 खोंईछे की तरह,
 क्या ऐसा कोई शब्द हो सकता है,
 जो किसी के मन के गहराइयों में उतर कर,
 बीती हुई कड़वी यादों को विस्मृत कर दे, 
मुझे लगता है, कोई शब्द तो ऐसा है जरूर, 
तभी तो कितने ही सारे लोग, जो पहले मुस्कुराते नहीं थे,
 मुस्कुराने लगते है, एक अर्से के बाद,
 कोई वो शब्द कह देता है उनके कानों में,
 फिर सारी कड़वी यादें विस्मृत हो जाती है।..................मनोरंजन

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