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Monday, August 25, 2014

उसे लगता है की,
जिंदगी उसे खुद-ब-खुद,
वो सब दे देगी, जिसका वो पात्र है,
मगर जनता नहीं की,
ये दुनिया एक बाज़ार है,
जहाँ खुद अपनी कीमत लगानी होती है,
अगर बेचना ना आए तो,
बेमोल बिक जाता है आदमी,
और अगर ख़ुद को बेचने का गुर सिख लिया तो,
बेसकीमती, अनमोल बन जाता है आदमी....................मनोरंजन
http://manoranjan234.blogspot.in/

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