उसे लगता है की,
जिंदगी उसे खुद-ब-खुद,
वो सब दे देगी, जिसका वो पात्र है,
मगर जनता नहीं की,
ये दुनिया एक बाज़ार है,
जहाँ खुद अपनी कीमत लगानी होती है,
अगर बेचना ना आए तो,
बेमोल बिक जाता है आदमी,
और अगर ख़ुद को बेचने का गुर सिख लिया तो,
बेसकीमती, अनमोल बन जाता है आदमी....................मनोरंजन
http://manoranjan234.blogspot.in/
जिंदगी उसे खुद-ब-खुद,
वो सब दे देगी, जिसका वो पात्र है,
मगर जनता नहीं की,
ये दुनिया एक बाज़ार है,
जहाँ खुद अपनी कीमत लगानी होती है,
अगर बेचना ना आए तो,
बेमोल बिक जाता है आदमी,
और अगर ख़ुद को बेचने का गुर सिख लिया तो,
बेसकीमती, अनमोल बन जाता है आदमी....................मनोरंजन
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