स्मृति शेष-9
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तारीफ करनी होगी,
तुम्हारे जज्बे की,
जीवन से सीखने के प्रति,
तुम्हारी गंभीरता की,
जीतनी सिद्धत से प्रेम निभाया तुमने,
उससे कई गुना सिद्धत से,
नफरत निभा दी,
मैं ही मूर्ख,
कुछ सीख ना पाया जीवन से,
ना प्रेम निभा सका ठीक से,
ना नफरत निभा पाया तुमसे।.................मनोरंजन
http://manoranjan234.blogspot.in/
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