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Friday, July 25, 2014

शुक्रिया परी
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शुक्रिया परी,
मुझे प्यार सिखने के लिये,
जीवन को समझने,
और जीने लायक बनाने के लिये,
पड़ते है तुम्हारे नन्हे पैर जहाँ,
उस हर जगह को ध्यान से देखता हूँ,
तुम्हे कोई आँच ना आ जाये,
तुम्हारे पैरों तले कोई काँच ना आ जाये,
शुक्रिया परी,
मुझे फिक्र करना,
और परवाह करना सिखने के लिये,
अब समझने लगा हूँ,
माँ के आँसुओं की भाषा,
अब समझने लगा हूँ,
पापा के चिड़चिड़ाहट के हद तक,
परेशान होने का मतलब,
सिखने लगा हूँ जीना किसी और के लिये,
शुक्रिया परी,
मुझे जीवन को समझाने के लिये।.............................मनोरंजन
http://manoranjan234.blogspot.in/


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