अधूरे रिश्ते
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कितना मुश्किल है,
अजनबियों के आँखों में,
अपने लिए स्नेह और अपनापन,
की तलाश करना,
और उससे भी ज्यादा मुश्किल है,
किसी अपने को अजनबी बना देना,
अधूरे रिश्ते में,
खतों का सिलसिला रुकता ही कहाँ है?
जो तुम मुझे रुकने को कहते हो,
वापस मुझे नहीं,
तुम्हे आना है,
मैं तो वहीं खड़ा हूँ,
जहाँ तुम मुझे छोड़ कर गये थे।...........मनोरंजन
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कितना मुश्किल है,
अजनबियों के आँखों में,
अपने लिए स्नेह और अपनापन,
की तलाश करना,
और उससे भी ज्यादा मुश्किल है,
किसी अपने को अजनबी बना देना,
अधूरे रिश्ते में,
खतों का सिलसिला रुकता ही कहाँ है?
जो तुम मुझे रुकने को कहते हो,
वापस मुझे नहीं,
तुम्हे आना है,
मैं तो वहीं खड़ा हूँ,
जहाँ तुम मुझे छोड़ कर गये थे।...........मनोरंजन
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