सॉरी बाबु
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सॉरी बाबु,
जिन्दगी सचमुच बहुत असान होती,
गर हम साथ होते।
मुमकिन था सबकुछ,
इसी ज़मी पर, इसी शहर में,
बहारे-जन्नत होती अपने कदमों में,
गर हम साथ होते।
चाँद भी अपना होता, और तारें भी,
आसमान का हर कोना हमारा होता,
यों अंधेरे की चाह ना होती,
रात चंदनी होती अपनी,
हर तरफ रोशनी और रागिनी होती,
गर हम साथ होते,
सॉरी बाबु,
जिन्दगी सचमुच बहुत असान होती,
गर हम साथ होते।
तुम रूठती तो मना लेता,
सोती तो जगा लेता,
रोती तो हंसा लेता,
तुम्हारे जुबां से तो गाली भी सुनने की आदत है मुझे,
कोई और देता है तो बर्दाश्त नहीं होता,
लोगों से नजरें चुरा कर,
खुद हो तन्हाइयों के चादर में,
लपेटने की चाहत ना होती,
यों रंजो-गम और अंसूओं से भीगी जिन्दगी ना होती,
गर हम साथ होते,
सॉरी बाबु,
जिन्दगी सचमुच बहुत असान होती,
गर हम साथ होते।.....................................मनोरंजन
http://manoranjan234.blogspot.in/
मनोरंजन
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सॉरी बाबु,
जिन्दगी सचमुच बहुत असान होती,
गर हम साथ होते।
मुमकिन था सबकुछ,
इसी ज़मी पर, इसी शहर में,
बहारे-जन्नत होती अपने कदमों में,
गर हम साथ होते।
चाँद भी अपना होता, और तारें भी,
आसमान का हर कोना हमारा होता,
यों अंधेरे की चाह ना होती,
रात चंदनी होती अपनी,
हर तरफ रोशनी और रागिनी होती,
गर हम साथ होते,
सॉरी बाबु,
जिन्दगी सचमुच बहुत असान होती,
गर हम साथ होते।
तुम रूठती तो मना लेता,
सोती तो जगा लेता,
रोती तो हंसा लेता,
तुम्हारे जुबां से तो गाली भी सुनने की आदत है मुझे,
कोई और देता है तो बर्दाश्त नहीं होता,
लोगों से नजरें चुरा कर,
खुद हो तन्हाइयों के चादर में,
लपेटने की चाहत ना होती,
यों रंजो-गम और अंसूओं से भीगी जिन्दगी ना होती,
गर हम साथ होते,
सॉरी बाबु,
जिन्दगी सचमुच बहुत असान होती,
गर हम साथ होते।.....................................मनोरंजन
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