एक ख्वाब के मरने की पीडा
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कुछ है जो मेरे दिल में उबलते रहती है,
कहीं, किसी की कमी हर पल अखरते रहती है,
एक अजनबी प्यास से तडपता रहा हूँ हर पल,
एक अनजानी तलाश में रात भर टकटकी लगाये रहता हूँ,
किसी ऐसे शख्स से मिलने की तमन्ना दिल में मचलती रहती है,
जिसके खामोश इशारे की भाषा समझ सकूँ,
सुबह के बेरहम- बदनसीब निंद,
जिसके कोमल स्वर की पुकार सुन,
उमंग से उछल पड़े,
मेरे मन के भावों को बीना कहे समझ सके,
ऐसे किसी अजनबी के तलाश में,
भटकता रहा हूँ, इस अजनबी जगह,
कुछ चेहरे आँखों के आगे से गुजर जाते है,
इनमें से, किसी-किसी पर नजरें ठहर भी जाती है,
मगर अफसोस, सच्चाई आँखों में जलने लगती है,
अपने ही अक्स से बातें करता हूँ रोज,
रोज मरता हूँ, पर जिन्दगी चलते रहती है,
जिन्दगी के अनगिनीत अवाजों के निचे दब कर,
दम तोडती, अपने दिल के चीख को सुनता हूँ,
दर्द से करहते हुए मेरे दिल से,
कुछ अस्पष्ट सी अवाज में,
एक जाना-पहचना सा नाम उकेरते जता है,
मगर मैं बार-बार, उसे झूठ साबित करने की कोशिश करता हूँ,
और उसी नाम के सहारे चली जा रही है जिन्दगी।..................................मनोरंजन
http://manoranjan234.blogspot.in/
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