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Thursday, May 1, 2014

विषैले फल
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आओ कुछ खुराफ़ात करें,
की जिन्दगी ठहरी हुई है बीच राह में जाने कब से,
कुछ साख तोड़ें रिस्तो की,
एक मुद्दत से सूखे पड़े है,
झंझोड़े पत्‍तें, जज़्बातों की,
गिरे ओश के बूँदें, आँसू बनकर,
की चेहरे पर धूल बहुत जमे पड़े है,
आओ कुछ चोट मारें कुल्हाडी की,
कट जाने दो अहम्, गुमान, गफ़लत के तने,
भरभरा कर गीर जाने दो इस पेड़ को,
की इस पेड़ पर बहुत विषैले फल लगे पड़े है...... मनोरंजन

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