Followers

Friday, May 23, 2014

कवि
===
कवियों की बीबियां बीमार नहीं होती,
बस तबीयत थोड़ी नासाज़ हो जाती है,
ठीक भी हो जाती है अपने आप ही,
कुछ महीनों में, कुछ सालों में,
बिना किसी दवा-दारू के, बिना किसी हकीम के,

कवियों के बच्चें कभी नराज नहीं होते,
रूठते नहीं, रोते भी नहीं किसी खिलौने को पाने को,
वक्त से पहले ही सयाने हो जाते है!

कवियों के बाप की पगड़ी नहीं उछाली जाती कहीं,
ना ही बैठाये जाते है कहीं सबसे पहले बुजुर्ग होने के नाते,
कवियों के बाप की तो शायद पगड़ी ही नहीं होती!

कवियों की माँ, नहीं रोती,
जब बेटा घर से कभी ना लौटने की सूरत में भी,
परदेश जाता है,
कवियों की माँ, नहीं देती उलाहना की,
इस साल भी उनका सोने का ज्यूट्तिया नहीं बना,
अपने बेटों के लम्बी उम्र का व्रत रखने के लिये,
बस लाल धागे में ,जीतने बेटे, उतने गिरह डाल,
बैठ जाती है तन्मयता से जियुट बंधन गोसाई की पूजा करने!

कवि भी पहनता है, खूब झख सफेद कुर्ता -पैजामा,
बस साल में आने वाले, अनगिनत होलियों के छीटें दिख जाती है .........मनोरंजन


No comments:

Post a Comment

Write here