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Friday, May 16, 2014

अधूरी कोशिशें
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मेरी कोशिशें,
अधूरी रह गयी शायद,
ना कर सका इतना पाक,
अपने मन-मंदिर को,
जहाँ बैठा सकूँ तुम्हे,
कर सकूँ तुमसे प्रेम याचना,
अब ढूंढता तुम्हे,
भीड़ में,
बाज़ार में,
पहुँच चुका हूँ मैं भी वहाँ,
जहाँ जाने से मुझे,
हमेशा बहुत एतराज रहा है,
और दुर्भाग्य देखो,
मेरी कोशिशें अब भी अधूरी है!............मनोरंजन
http://manoranjan234.blogspot.in/




1 comment:

  1. मैं जमीं व आसमां की हदें मिला देता
    कोई सितारा जो गर झुकके चूमता मुझको

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