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Saturday, May 10, 2014

गफ़लत
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नहीं चलना मुझे आपके,
हक़ीकत की ठोस धरातल पर,
मेरे पैरों में छाले पड जायेंगे,
मत दिखाओ मुझे सच्चाई,
सच के किरच मेरे आँखों में चुभ जायेंगे,
रहने दो मुझे गफ़लत में,
ख़्वाबों में जीने दो,
उड़ने दो मुझे रूई के फाहों के संग,
आसमां के पार उस जहां तक,
जहाँ मखमली, फूलों की सेज़ सजी है,
सोने दो मुझे खूबसूरत परिओं के बाहों में,
नहीं जीना मुझे आपके,
दुनिया के तंग गलियों में,
पहेली सी, अनजान रास्तों पर जाना ही नहीं
जो  अचानक कहीं से भी मुड जाते है,
बिछड़ जाता है, कोई अपना दिल-ए-अजीज,
नहीं भटकना मुझे फिर किसी अजनबी के तलाश में,
खिलखिलाने दो मुझे बच्चों की तरह,
बनाने दो धरौंदें नदी के तट पर,
रहने दो मुझे गफ़लत में,
गफ़लत में जिंदगी ख़ूबसूरत नज़र आती है l
......................
मनोरंजन

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