Followers

Saturday, May 3, 2014

कितना सुन्दर था बचपन!
=================
कितना सुन्दर था बचपन,
निश्छल, निर्मल, खूबसूरत मन!

उन्मुक्त हँसी, तरुणाई थी,
आँखों में अनंत गहराई थी,
सारे सपने थे मुठ्ठी में,
ना उलझे थे किसी गुत्थी में!
बादशाह हमीं थे, शेख हमीं,
निराशा का ना था रेख कहीं,
कच्चा-पक्का खा लेते थे,
पत्थर पर दूब उगाते थे,
हम चिड़ियों से बतियाते थे,
बिल्ली के घर के चिंता में,
घर अपना, जाना भूल जाते थे!

आँखों में चमक लाने को,
जुगनुओं की रोशनी काफी थी,
दोस्ती के मायने कुछ और ही थे,
हर गलती के लिये तब माफी थी

कितना सुन्दर था बचपन,
निश्छल, निर्मल, खूबसूरत मन!........to be continue
-----------------------------

मनोरंजन

No comments:

Post a Comment

Write here