कविताएं मर्म स्पर्शी होती है,
जीवन के हर रंग की आरुषि होती है,
भावुकता व विद्रोह की अभिव्यक्ति होती है,
समाज को सही दिशा दिखाने की एक कोशिश होती है,
शिल्प,सृजन व सौंदर्य से विभूषित,
कविताएं,
कुरूपता नहीं सह पाती,
विकृति व विरूपित मानसिकता नहीं सह पाती,
बिखर जाती है कविता,
कविताओं में तुकांत, विधान का ख़्याल रखना पड़ता
है,
लोग पढ़ते है कविता,
गुनगुनाते भी है इसे,
भावों को समझ भावुक होते है,
मेरी कोशिशें अधूरी है शायद,
गढ़ने नहीं आती ऐसी कविता,
या शायद मैं कवि नहीं,
स्वयम् कविता हूँ,
जो लिखता हूँ वो उन कविताओं का भावार्थ होता है,
और इन सभी अर्थों को जोड़ कर देखो,
सबका मतलब सिर्फ एक है,
की मैं कविता क्यूं हूँ................मनोरंजन
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