दिल के रिश्ते साँसों की तरह होते है
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नहीं परी, दिल के रिश्ते,
कुछ हासील करने को नहीं बनते,
दिल के रिश्ते तो साँसों की तरह होते है,
शरीर के पास विकल्प नहीं होता साँसों का,
राजमन्दी नहीं होती की सांस ले की नहीं,
जो हालत शरीर की साँसों के बिना होती है,
वही हालत दिल की अपने प्रियतम बिना होती है,
तड़पता है कुछ समय तक फिर निर्जीव हो जाता है,
दिल की बिडंबना यह है की,
यह दिखता नहीं, इसलिये इसका जनाज़ा भी उठने की,
परवाह नहीं होती किसी को..............मनोरंजन
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