कल रात मिला अपने आप से!
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मिल रहा था मैं कल रात,
अपने आप से,
पलट रहा था पन्ने,
अपने जीवन के,
मेरी पुरानी डायरी,
मेरे नोट-बुक,
और पुराने कागज के पुलिंदे,
मैं चकित था, देख कर,
क्या-क्या लिख रखा है इन पन्नों में,
माँ-बाबा को झूठी तसल्ली देती चिठ्ठियाँ,
जो भेज ना सका,
अति उत्साह में लिखी मेरी कविताएं,
कुछ नोट्स,
पुराने हो चूके कुछ दोस्तों का फ़ोन न.,
दोस्तों के साथ गुजरी यादों को समेटती कुछ पंक्तियाँ,
कुछ नौकरियों की अर्जियां,
कुछ ऐसे लोगों के नाम, पते, जिन्हे पढ़
सोचने लगा की ये कौन थे,
और हर पेज के दाहिने तरफ,
तुम्हारे नाम का पहला अक्षर,
जिसे लिखा था सबसे छुपाने के लिये........मनोरंजन
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मिल रहा था मैं कल रात,
अपने आप से,
पलट रहा था पन्ने,
अपने जीवन के,
मेरी पुरानी डायरी,
मेरे नोट-बुक,
और पुराने कागज के पुलिंदे,
मैं चकित था, देख कर,
क्या-क्या लिख रखा है इन पन्नों में,
माँ-बाबा को झूठी तसल्ली देती चिठ्ठियाँ,
जो भेज ना सका,
अति उत्साह में लिखी मेरी कविताएं,
कुछ नोट्स,
पुराने हो चूके कुछ दोस्तों का फ़ोन न.,
दोस्तों के साथ गुजरी यादों को समेटती कुछ पंक्तियाँ,
कुछ नौकरियों की अर्जियां,
कुछ ऐसे लोगों के नाम, पते, जिन्हे पढ़
सोचने लगा की ये कौन थे,
और हर पेज के दाहिने तरफ,
तुम्हारे नाम का पहला अक्षर,
जिसे लिखा था सबसे छुपाने के लिये........मनोरंजन
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