मुझे पहले से पता था,
की जिंदगी एक दिन सिमट जायेगी एक नीड़ में,
व्यर्थ और बेमानी हो जायेंगे,
वो सारे शब्द जिन्हे सुन कर,
मेरे कानों में संगीत की धुन,
बजते रहा है अब तक,
बिखर जायेगा वो सारा संगीत,
बच जायेगा बस,
मन के अंदर बजता खालीपन,
कितने ही वो एहसास,
निर्जीव हो जायेंगे,
जो हम अपने मित्रों से,
अलग होते हुए,
बांध कर रख लेते थे,
अपने मन के किसी कोने में,
बदल जायेंगे अर्थ अब,
उन शब्दों के,
जिन्हे सुन कर मन झंकृत हो जाते थे,
अब तो बस बच जायेगी,
जीवन के कश्मकश,
मृग तृष्णा,
मन के खालीपन को,
भौतिक चीज़ों से भरने की,
अब लड़ने को बच जायेगा,
खुद का अपना अंतरद्वंद्व…………………
...............मनोरंजन
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