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Tuesday, May 13, 2014

जीवन
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बंद कमरे में चीत का अशांत हो जाना,
ज्यादा सरल है,
किसी भीड़-भाड़ वाले जगह के तुलना में,
बंदिशों के बीच भटक जाना,
गलत रास्ते पर फिसल जाना ज्यादा असान है,
किसी खुले महौल के, मुक्त वातावरण के तुलना में,
जरूरत से ज्यादा परहेज,
जीवन को मुश्किलों से, कष्ट से भर देता है,
जीवन में अगर कोई संघर्ष ना हो,
तो आदमी अक्षम, और कायर बन जाता है,
जिम्मेवारियां जरूरी है,
इसके अभाव में आदमी जड़-चेतन, अकर्मण्य बन जाता है,
फ़िक्र करने को ग़र कुछ ना हो,
तो इंसान चिर-स्थाई गमज़दा हो जाता है,
जीवन में कठोरता से टकराना सेहत के लिये अच्छा है,
कोमलता इंसान को निर्बल बना देता है,
प्रेम में बहे आँसू, अमृत के समान है,
ये इंसान को निर्मल व सहृदय बना देता है,
मनुष्यता को प्राप्त करना कभी असान नहीं रहा,
प्रकाश बिखेरने के लिये,
खुद को जलाना पड़ता है,
दर्द सहे बिना जीवन को आकार नहीं मिलता,
बिना दुःख, कभी सुख का एहसास नहीं होता............मनोरंजन


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