परी,
तुम जब अस्सी साल की हो जाओगी ना,
तब भी तुम्हारे झुर्रियों वाले गालों पर,
एक चुंबन लेने की जुस्तज़ू बची रहेगी मेरे मन में,
और बची रहेगी वो सारी अधूरी आकांक्षाएं,
जो मेरे मन में तुमसे जुड़ी है,
तुम्हारी हर वो अमानत,जो मेरे पास है,
रखी मिलेगी तुम्हे, ज्यों के त्यों,
तुम्हारे वापस आनएके इंतजार में,
फूलों की कुछ सुखी पंखुड़ियाँ,
जो तुम्हे दे ना सका,
रखी मिलेगी मेरे सबसे अच्छी किताब के पन्नों में,
कुछ कंपते हुए अनकहे शब्द,
बचे रहेंगे मेरे लबों पर,
जो तुम्हारी जिंदगी जीने की उत्कट आतुरता,
और तेज रफ़्तार तुम्हारी आकांक्षाओं की उड़ान,
में दब गये थे कभी,
अनवरत होते नाम आँखों को समझा लूंगा,
और बचा के रख लूँगा,
आँसूं के कुछ बूँदे,
तुम्हारे वापस आने की खुशी में बहाने के लिये,
और बचाये रखूंगा उस जज्बे को,
जो एक बार तुम्हारे गोद में सर रख कर,
चीर निंद्रा में सो जाने को,
उद्दत है जाने कब से,...............मनोरंजन
तुम जब अस्सी साल की हो जाओगी ना,
तब भी तुम्हारे झुर्रियों वाले गालों पर,
एक चुंबन लेने की जुस्तज़ू बची रहेगी मेरे मन में,
और बची रहेगी वो सारी अधूरी आकांक्षाएं,
जो मेरे मन में तुमसे जुड़ी है,
तुम्हारी हर वो अमानत,जो मेरे पास है,
रखी मिलेगी तुम्हे, ज्यों के त्यों,
तुम्हारे वापस आनएके इंतजार में,
फूलों की कुछ सुखी पंखुड़ियाँ,
जो तुम्हे दे ना सका,
रखी मिलेगी मेरे सबसे अच्छी किताब के पन्नों में,
कुछ कंपते हुए अनकहे शब्द,
बचे रहेंगे मेरे लबों पर,
जो तुम्हारी जिंदगी जीने की उत्कट आतुरता,
और तेज रफ़्तार तुम्हारी आकांक्षाओं की उड़ान,
में दब गये थे कभी,
अनवरत होते नाम आँखों को समझा लूंगा,
और बचा के रख लूँगा,
आँसूं के कुछ बूँदे,
तुम्हारे वापस आने की खुशी में बहाने के लिये,
और बचाये रखूंगा उस जज्बे को,
जो एक बार तुम्हारे गोद में सर रख कर,
चीर निंद्रा में सो जाने को,
उद्दत है जाने कब से,...............मनोरंजन
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