भगवानजी भी रिश्वत लेते है
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भगवानजी भी रिश्वत लेते है,
और खूब ठोक-बजा कर लेते है,
जीतना भरी रिश्वत उतना बड़ा कल्याण,
भगवानजी के पैगम्बर यहाँ धरती पर कहते है,
स्वर्ग यहीं है, नर्क यहीं है,
तो सोचो कैसे दरिद्र नर-नारायण को देख,
नाक सिकोड़ने वाला,
पत्थर के बने नारायण की पूजा -अर्चना कर,
कैसे धरती पर ही स्वर्ग का सुख भोगता है!
पर भगवानजी तो गीता में कहते है,
की दरिद्र नारायण की सेवा सर्वोपरि है,
तो या तो भगवानजी की गीता कोरी किताब है,
या भगवान जी रिश्वत लेते है,
कैसे उन्ही फटे- पुराने कपड़ों में खड़ी कन्याओं को देख,
हिकारत से देखने वाला आदमी,
नवरात्र में में, उन्ही कन्याओं को, कन्यभोज खिलाता है,
और माँ दुर्गा, उसकी दुआ कबूल भी करती है,
हर बधा-विघ्ना से बचा कर,
छप्पर-फाड़ दौलत दे देते है,
कैसे मान लूँ मैं की भगवानजी रिश्वत नहीं लेते,
भगवानजी रिश्वत लेते है!...............................मनोरंजन
http://manoranjan234.blogspot.in/
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