कविता सी कुछ ---------
यह मेरे किताब की रफ़ पण्डुलिपि है
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Thursday, May 1, 2014
अंदर अँधेरा, बाहर दीपक जलाए बैठे है,
आँखों में उमड़ता आँसुओ का सैलाब, होठों पर मुस्कुराहट सजाये बैठे है,
ये तुम्हारी हसरत है, या मेरे मन का अँधेरा,
तुम्हारी हर लब्ज़ को दिल के अन्दर छुपाए बैठे है!..........मनोरंजन
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